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mahabharat 16.7.45: बुद्धिमान् एवं बलवान अर्जुन भ्रमण करते हुए अत्यंत समृद्ध पंचनद देश में पहुँचे, जो गौओं, पशुओं तथा धन-धान्य से समृद्ध था, और ऐसे प्रदेश में उन्होंने अपना डेरा डाला ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  16.7.45 
स पञ्चनदमासाद्य धीमानतिसमृद्धिमत्।
देशे गोपशुधान्याढॺे निवासमकरोत् प्रभु:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान् एवं बलवान अर्जुन भ्रमण करते हुए अत्यंत समृद्ध पंचनद देश में पहुँचे, जो गौओं, पशुओं तथा धन-धान्य से समृद्ध था, और ऐसे प्रदेश में उन्होंने अपना डेरा डाला ॥45॥
 
While traveling, the intelligent and powerful Arjuna reached the very prosperous Panchanada country, which was rich in cows, animals and wealth and grains, and camped in such a region. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)