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mahabharat 16.7.44: अर्जुन वृष्णि वंश की स्त्रियों को हर ले जा रहे थे, जो सुन्दर वनों, पर्वतों और नदियों के तट पर रहती थीं।   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  16.7.44 
काननेषु च रम्येषु पर्वतेषु नदीषु च।
निवसन्नानयामास वृष्णिदारान् धनंजय:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन वृष्णि वंश की स्त्रियों को हर ले जा रहे थे, जो सुन्दर वनों, पर्वतों और नदियों के तट पर रहती थीं।
 
Arjuna was taking away the women of the Vrishni clan, who resided in the beautiful forests, mountains and on the banks of rivers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)