Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 16.7.43: यह अद्भुत दृश्य देखकर द्वारकावासी बड़ी तेजी से चलने लगे। उस समय उनके मुख से बार-बार यही शब्द निकल रहे थे, 'ईश्वर की लीला विचित्र है।' 43.   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  16.7.43 
तदद्भुतमभिप्रेक्ष्य द्वारकावासिनो जना:।
तूर्णात् तूर्णतरं जग्मुरहो दैवमिति ब्रुवन्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यह अद्भुत दृश्य देखकर द्वारकावासी बड़ी तेजी से चलने लगे। उस समय उनके मुख से बार-बार यही शब्द निकल रहे थे, 'ईश्वर की लीला विचित्र है।' 43.
 
Seeing this wonderful sight, the people of Dwarka started walking very fast. At that time, the words that kept coming out of their mouths were 'The divine play is strange'. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)