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mahabharat 16.7.37-38: अंधक आदि वृष्णिवंशियों को अर्जुन पर विश्वास था। वे तथा ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, धनवान शूद्र और भगवान श्रीकृष्ण की सोलह हजार पत्नियाँ - ये सभी बुद्धिमान श्रीकृष्ण के पौत्र वज्र के आगे-आगे चल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  16.7.37-38 
पुत्राश्चान्धकवृष्णीनां सर्वे पार्थमनुव्रता:।
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: शूद्राश्चैव महाधना:॥ ३७॥
दश षट् च सहस्राणि वासुदेवावरोधनम्।
पुरस्कृत्य ययुर्वज्रं पौत्रं कृष्णस्य धीमत:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अंधक आदि वृष्णिवंशियों को अर्जुन पर विश्वास था। वे तथा ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, धनवान शूद्र और भगवान श्रीकृष्ण की सोलह हजार पत्नियाँ - ये सभी बुद्धिमान श्रीकृष्ण के पौत्र वज्र के आगे-आगे चल रहे थे।
 
Andhak and all the children of Vrishni dynasty had faith in Arjun. They and the Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas, rich Shudras and sixteen thousand wives of Lord Shri Krishna – all of them were walking ahead of the wise Shri Krishna's grandson Vajra. 37-38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)