श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  16.7.34-35 
भृत्याश्चान्धकवृष्णीनां सादिनो रथिनश्च ये॥ ३४॥
वीरहीनं वृद्धबालं पौरजानपदास्तथा।
ययुस्ते परिवार्याथ कलत्रं पार्थशासनात्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन की आज्ञा पाकर अन्धकों और वृष्णियों के सेवक, घुड़सवार, सारथी तथा नगर और प्रान्त के लोग, वृद्धों और विधवाओं को उनके बच्चों सहित चारों ओर से घेरकर आगे बढ़ने लगे ॥34-35॥
 
At Arjuna's command the servants of the Andhakas and the Vrishnis, horse-riders, charioteers and the people of the city and provinces began to move, surrounding the old men and the widows with their children on all sides. ॥34-35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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