श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  16.7.26 
तत: प्रादुरभूच्छब्द: समिद्धस्य विभावसो:।
सामगानां च निर्घोषो नराणां रुदतामपि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उस समय प्रज्वलित अग्नि की चटकती ध्वनि, वैदिक मन्त्रों का उच्चारण करने वाले ब्राह्मणों की गम्भीर ध्वनि तथा रोते हुए लोगों का विलापपूर्ण क्रन्दन एक साथ प्रकट हुआ।
 
At that time the crackling sound of the blazing fire, the deep sound of the Brahmins reciting Vedic mantras and the wailing cries of the weeping people appeared simultaneously. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)