श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  16.7.25 
तं वै चतसृभि: स्त्रीभिरन्वितं पाण्डुनन्दन:।
अदाहयच्चन्दनैश्च गन्धैरुच्चावचैरपि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
पाण्डु नन्दन अर्जुन ने चारों पत्नियों सहित वसुदेवजी के मृत शरीर को चन्दन तथा नाना प्रकार के सुगन्धित द्रव्यों से दाहित किया॥25॥
 
Pandu Nandan Arjun burnt the dead body of Vasudevji, united with his four wives, with sandalwood and various types of aromatic substances. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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