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mahabharat 16.7.21: उनकी अर्थी के आगे ब्राह्मण पुजारी चल रहे थे, जो अश्वमेध यज्ञ में प्रयुक्त छत्र और अग्निहोत्र की जलती हुई अग्नि लिए हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  16.7.21 
तस्याश्वमेधिकं छत्रं दीप्यमानाश्च पावका:।
पुरस्तात् तस्य यानस्य याजकाश्च ततो ययु:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उनकी अर्थी के आगे ब्राह्मण पुजारी चल रहे थे, जो अश्वमेध यज्ञ में प्रयुक्त छत्र और अग्निहोत्र की जलती हुई अग्नि लिए हुए थे।
 
Ahead of his bier walked the Brahmin priests, carrying the umbrella used in the Ashwamedha sacrifice and the burning fire of the Agnihotra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)