श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  16.7.2 
नाहं वृष्णिप्रवीरेण बन्धुभिश्चैव मातुल।
विहीनां पृथिवीं द्रष्टुं शक्यामीह कथंचन॥ २॥
 
 
अनुवाद
चाचाजी! अब मैं इस पृथ्वी को वृष्णिवंश के प्रधान नायक भगवान श्रीकृष्ण और अपने भाइयों से रहित नहीं देख सकूँगा॥ 2॥
 
Uncle! I will no longer be able to see this earth devoid of the chief hero of the Vrishni clan, Lord Krishna, and my brothers.॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd