श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  16.7.17 
प्रकीर्णमूर्धजा: सर्वा विमुक्ताभरणस्रज:।
उरांसि पाणिभिर्घ्नन्त्यो व्यलपन् करुणं स्त्रिय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उनके सारे बाल बिखरे हुए थे। उन्होंने अपने गहने और मालाएँ फाड़कर फेंक दी थीं। सभी स्त्रियाँ छाती पीट रही थीं और करुण विलाप कर रही थीं।
 
All of their hair was loose. They had torn off their ornaments and garlands and thrown them away. All the women were beating their chests with their hands and wailing pitifully.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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