श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  16.7.15 
श्वोभूतेऽथ तत: शौरिर्वसुदेव: प्रतापवान्।
युक्त्वाऽऽत्मानं महातेजा जगाम गतिमुत्तमाम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
प्रातःकाल होते ही महान् तेजस्वी शूरनंदन यशस्वी वसुदेवजी ने भगवान् में मन को एकाग्र करके योग के द्वारा उत्तम गति प्राप्त की ॥15॥
 
As soon as the morning broke, the great and brilliant Shuranandan, the glorious Vasudevji, by concentrating his mind on God, achieved the best speed through yoga. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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