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mahabharat 16.7.14: उस रात अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण के महल में ठहरे और वहाँ पहुँचते ही उन्हें अचानक महान शोक और व्याकुलता का अनुभव हुआ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 16.7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 7: वसुदेवजी तथा मौसलयुद्धमें मरे हुए यादवोंका अन्त्येष्टि संस्कार करके अर्जुनका द्वारकावासी स्त्री-पुरुषोंको अपने साथ ले जाना, समुद्रका द्वारकाको डुबो देना और मार्गमें अर्जुनपर डाकुओंका आक्रमण, अवशिष्ट यादवोंको अपनी राजधानीमें बसा देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  16.7.14 
तां रात्रिमवसत् पार्थ: केशवस्य निवेशने।
महता शोकमोहेन सहसाभिपरिप्लुत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस रात अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण के महल में ठहरे और वहाँ पहुँचते ही उन्हें अचानक महान शोक और व्याकुलता का अनुभव हुआ॥14॥
 
Arjuna stayed that night in Lord Krishna's palace. As soon as he reached there, he was suddenly overcome with great grief and confusion.॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)