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श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 6: द्वारकामें अर्जुन और वसुदेवजीकी बातचीत  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  16.6.6-7h 
यौ तावर्जुन शिष्यौ ते प्रियौ बहुमतौ सदा॥ ६॥
तयोरपनयात् पार्थ वृष्णयो निधनं गता:।
 
 
अनुवाद
अर्जुन! आपके प्रिय शिष्यों (सात्यकि और प्रद्युम्न) के अन्याय के कारण, जिनका आप बहुत आदर करते थे, समस्त वृष्णिवंशी नष्ट हो गए हैं॥6 1/2॥
 
Arjun! Due to the injustice done by your favourite disciples (Satyaki and Pradyumna) who were respected by you a lot, all the Vrishni clan have died. ॥ 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)