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mahabharat 16.6.3: शत्रुराज! महाबाहु अनकदुन्दुभि (वसुदेव) चाहते थे कि मैं अपने भतीजे अर्जुन का सिर सूँघूँ; किन्तु असमर्थता के कारण वे ऐसा न कर सके॥3॥   |   mahabharat अध्याय 16.6: द्वारकामें अर्जुन और वसुदेवजीकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  16.6.3 
तस्य मूर्धानमाघ्रातुमियेषानकदुन्दुभि:।
स्वस्रीयस्य महाबाहुर्न शशाक च शत्रुहन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
शत्रुराज! महाबाहु अनकदुन्दुभि (वसुदेव) चाहते थे कि मैं अपने भतीजे अर्जुन का सिर सूँघूँ; किन्तु असमर्थता के कारण वे ऐसा न कर सके॥3॥
 
Enemy king! The mighty-armed Anakadundubhi (Vasudev) wanted me to smell the head of my nephew Arjuna; But due to inability they could not do so. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)