Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 16.6.28: पार्थ! श्रीकृष्ण ने जो कहा है, वही करो। यह राज्य, ये स्त्रियाँ और ये रत्न-सब तुम्हारे अधीन हैं। शत्रुसूदन! अब मैं निश्चिंत होकर अपने प्रिय प्राण त्याग दूँगा॥ 28॥ | mahabharat अध्याय 16.6: द्वारकामें अर्जुन और वसुदेवजीकी बातचीत । mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदुक्तं पार्थ कृष्णेन तत् सर्वमखिलं कुरु।
एतत् ते पार्थ राज्यं च स्त्रियो रत्नानि चैव हि।
इष्टान् प्राणानहं हीमांस्त्यक्ष्यामि रिपुसूदन॥ २८॥
अनुवाद
पार्थ! श्रीकृष्ण ने जो कहा है, वही करो। यह राज्य, ये स्त्रियाँ और ये रत्न-सब तुम्हारे अधीन हैं। शत्रुसूदन! अब मैं निश्चिंत होकर अपने प्रिय प्राण त्याग दूँगा॥ 28॥
Partha! Do whatever Shri Krishna has said. This kingdom, these women and these gems – all are under your control. Shatrusudan! Now I will give up my dear life without any worry.॥ 28॥
इति श्रीमहाभारते मौसलपर्वणि अर्जुनवसुदेवसंवादे षष्ठोऽध्याय:॥ ६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत मौसलपर्वमें अर्जुन और वसुदेवका संवादविषयक छठा अध्याय पूरा हुआ॥ ६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥