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mahabharat 16.5.4: हे प्रभु! दारुक के साथ वृष्णियों के निवास पर पहुँचकर वीर अर्जुन ने देखा कि द्वारका नगरी विधवा के समान दरिद्र हो गई है।   |   mahabharat अध्याय 16.5: अर्जुनका द्वारकामें आना और द्वारका तथा श्रीकृष्ण-पत्नियोंकी दशा देखकर दुखी होना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  16.5.4 
स वृष्णिनिलयं गत्वा दारुकेण सह प्रभो।
ददर्श द्वारकां वीरो मृतनाथामिव स्त्रियम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! दारुक के साथ वृष्णियों के निवास पर पहुँचकर वीर अर्जुन ने देखा कि द्वारका नगरी विधवा के समान दरिद्र हो गई है।
 
Lord! After reaching the residence of the Vrishnis along with Daruk, brave Arjun saw that the city of Dwaraka had become destitute like a widow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)