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mahabharat 16.5.13: प्रजानाथ! तब सत्राजित की पुत्री सत्यभामा तथा रुक्मिणी आदि रानियाँ दौड़ती हुई वहाँ आईं और अर्जुन को घेरकर जोर-जोर से विलाप करने लगीं॥13॥   |   mahabharat अध्याय 16.5: अर्जुनका द्वारकामें आना और द्वारका तथा श्रीकृष्ण-पत्नियोंकी दशा देखकर दुखी होना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 5: अर्जुनका द्वारकामें आना और द्वारका तथा श्रीकृष्ण-पत्नियोंकी दशा देखकर दुखी होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  16.5.13 
सात्राजिती तत: सत्या रुक्मिणी च विशाम्पते।
अभिपत्य प्ररुरुदु: परिवार्य धनंजयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! तब सत्राजित की पुत्री सत्यभामा तथा रुक्मिणी आदि रानियाँ दौड़ती हुई वहाँ आईं और अर्जुन को घेरकर जोर-जोर से विलाप करने लगीं॥13॥
 
Prajanath! Then Satrajit's daughter Satyabhama and Rukmini etc. queens came running there and surrounded Arjun and started wailing loudly. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)