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mahabharat 16.5.12: द्वारका और भगवान श्रीकृष्ण की पत्नियों को देखकर अर्जुन अत्यन्त विलाप करने लगे और मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े॥12॥   |   mahabharat अध्याय 16.5: अर्जुनका द्वारकामें आना और द्वारका तथा श्रीकृष्ण-पत्नियोंकी दशा देखकर दुखी होना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 5: अर्जुनका द्वारकामें आना और द्वारका तथा श्रीकृष्ण-पत्नियोंकी दशा देखकर दुखी होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  16.5.12 
तां दृष्ट्वा द्वारकां पार्थस्ताश्च कृष्णस्य योषित:।
सस्वनं बाष्पमुत्सृज्य निपपात महीतले॥ १२॥
 
 
अनुवाद
द्वारका और भगवान श्रीकृष्ण की पत्नियों को देखकर अर्जुन अत्यन्त विलाप करने लगे और मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े॥12॥
 
Seeing Dwarka and the wives of Lord Krishna, Arjuna began to cry profusely and fell unconscious on the ground.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)