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mahabharat 16.4.7: भैया बलराम! तुम यहीं ठहरो और मेरी प्रतीक्षा करो, जब तक मैं इन स्त्रियों को उनके परिवारवालों के सुपुर्द न कर दूँ।’ ऐसा कहकर श्रीकृष्ण द्वारिकापुरी चले गए और वहाँ अपने पिता वसुदेवजी से बोले-॥7॥   |   mahabharat अध्याय 16.4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  16.4.7 
इहैव त्वं मां प्रतीक्षस्व राम
यावत् स्त्रियो ज्ञातिवशा: करोमि।
तत: पुरीं द्वारवतीं प्रविश्य
जनार्दन: पितरं प्राह वाक्यम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भैया बलराम! तुम यहीं ठहरो और मेरी प्रतीक्षा करो, जब तक मैं इन स्त्रियों को उनके परिवारवालों के सुपुर्द न कर दूँ।’ ऐसा कहकर श्रीकृष्ण द्वारिकापुरी चले गए और वहाँ अपने पिता वसुदेवजी से बोले-॥7॥
 
Brother Balarama! You stay here and wait for me till I hand over the women to the care of their family members.' Saying this, Shri Krishna went to Dwarikapuri and there he said to his father Vasudevji -॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)