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mahabharat 16.4.27: नरेश्वर! तत्पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण ने बड़े-बड़े गन्धर्वों, सुन्दरी अप्सराओं, सिद्धों और साध्यों द्वारा विनयपूर्वक पूजा की तथा देवताओं, ऋषियों और भाटों से भी भेंट की॥27॥   |   mahabharat अध्याय 16.4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  16.4.27 
ततो देवैर्ऋषिभिश्चापि कृष्ण:
समागतश्चारणैश्चैव राजन्।
गन्धर्वाग्रॺैरप्सरोभिर्वराभि:
सिद्धै: साध्यैश्चानतै: पूज्यमान:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! तत्पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण ने बड़े-बड़े गन्धर्वों, सुन्दरी अप्सराओं, सिद्धों और साध्यों द्वारा विनयपूर्वक पूजा की तथा देवताओं, ऋषियों और भाटों से भी भेंट की॥27॥
 
Nareshwar! Thereafter, Lord Krishna was worshiped with humility by the great Gandharvas, beautiful Apsaras, Siddhas and Sadhyas and also met the gods, sages and bards. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)