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mahabharat 16.4.21: भगवान श्रीकृष्ण समस्त अर्थों के तत्त्वज्ञ और अविनाशी देव हैं। फिर भी उस समय उन्हें शरीर से मुक्ति आदि सांसारिक कार्यों को पूर्ण करने के लिए कोई साधन प्राप्त करने की इच्छा हुई। तब उन्होंने मन, वाणी और इन्द्रियों को वश में करके महायोग (समाधि) का आश्रय लिया और पृथ्वी पर लेट गए। 21॥   |   mahabharat अध्याय 16.4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  16.4.21 
देवोऽपि सन् देहविमोक्षहेतो-
र्निमित्तमैच्छत् सकलार्थतत्त्ववित्।
स संनिरुद्धेन्द्रियवाङ्मनास्तु
शिश्ये महायोगमुपेत्य कृष्ण:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण समस्त अर्थों के तत्त्वज्ञ और अविनाशी देव हैं। फिर भी उस समय उन्हें शरीर से मुक्ति आदि सांसारिक कार्यों को पूर्ण करने के लिए कोई साधन प्राप्त करने की इच्छा हुई। तब उन्होंने मन, वाणी और इन्द्रियों को वश में करके महायोग (समाधि) का आश्रय लिया और पृथ्वी पर लेट गए। 21॥
 
Lord Shri Krishna is the philosopher of all meanings and an indestructible god. Still, at that time he wished to get some instrument to complete the worldly activities like salvation from the body. Then, after controlling his mind, speech and senses, he took refuge in Mahayoga (Samadhi) and lay down on the earth. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)