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mahabharat 16.4.17-18: उपर्युक्त सभी लोग उनके स्वागत के लिए आगे आए, उनका सत्कार किया और अर्घ्य-पाद्य आदि देकर उनकी पूजा पूर्ण की। भाई बलराम के परमधाम में आ जाने पर, समस्त गतियों को जानने वाले दिव्यदृष्टि संपन्न भगवान श्रीकृष्ण कुछ सोचते हुए उस निर्जन वन में विचरण करने लगे। तब वे महान तेज वाले भगवान पृथ्वी पर बैठ गए। सबसे पहले उन्हें वे सब बातें याद आईं जो गांधारी देवी ने उनसे पहले कही थीं॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 16.4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  16.4.17-18 
प्रत्युद्‍गम्य स्वागतेनाभ्यनन्दं-
स्तेऽपूजयंश्चार्घ्यपाद्यक्रियाभि:।
ततो गते भ्रातरि वासुदेवो
जानन् सर्वा गतयो दिव्यदृष्टि:॥ १७॥
वने शून्ये विचरंश्चिन्तयानो
भूमौ चाथ संविवेशाग्रॺतेजा:।
सर्वं तेन प्राक्तदा वित्तमासीद्
गान्धार्या यद् वाक्यमुक्त: स पूर्वम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त सभी लोग उनके स्वागत के लिए आगे आए, उनका सत्कार किया और अर्घ्य-पाद्य आदि देकर उनकी पूजा पूर्ण की। भाई बलराम के परमधाम में आ जाने पर, समस्त गतियों को जानने वाले दिव्यदृष्टि संपन्न भगवान श्रीकृष्ण कुछ सोचते हुए उस निर्जन वन में विचरण करने लगे। तब वे महान तेज वाले भगवान पृथ्वी पर बैठ गए। सबसे पहले उन्हें वे सब बातें याद आईं जो गांधारी देवी ने उनसे पहले कही थीं॥17-18॥
 
All the above-mentioned people came forward to receive him, welcomed him with welcome and completed his worship by offering arghya-padya etc. After brother Balarama's arrival at the supreme abode, the divine-sighted Lord Krishna, who knew all the movements, started wandering in that deserted forest, thinking about something. Then that Lord with great brilliance sat on the earth. First of all, he remembered all those things that Gandhari Devi had told him earlier.॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)