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mahabharat 16.4.15-16: राजन! कर्कोटक, वासुकि, तक्षक, पृथुश्रवा, अरुण, कुंजर, मिश्री, शंख, कुमुद, पुण्डरीक, महापुरुष धृतराष्ट्र, ह्रद, क्रथ, शितिकंठ, उग्रतेज, चक्रमन्द, अतिशन्द, नागप्रवर दुर्मुख, अम्बरीष और स्वयं राजा वरुण ने भी उनका स्वागत किया। 15-16॥   |   mahabharat अध्याय 16.4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  16.4.15-16 
कर्कोटको वासुकिस्तक्षकश्च
पृथुश्रवा अरुण: कुञ्जरश्च।
मिश्री शङ्ख: कुमुद: पुण्डरीक-
स्तथा नागो धृतराष्ट्रो महात्मा॥ १५॥
ह्राद: क्राथ: शितिकण्ठोग्रतेजा-
स्तथा नागौ चक्रमन्दातिषण्डौ।
नागश्रेष्ठो दुर्मुखश्चाम्बरीष:
स्वयं राजा वरुणश्चापि राजन्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजन! कर्कोटक, वासुकि, तक्षक, पृथुश्रवा, अरुण, कुंजर, मिश्री, शंख, कुमुद, पुण्डरीक, महापुरुष धृतराष्ट्र, ह्रद, क्रथ, शितिकंठ, उग्रतेज, चक्रमन्द, अतिशन्द, नागप्रवर दुर्मुख, अम्बरीष और स्वयं राजा वरुण ने भी उनका स्वागत किया। 15-16॥
 
Rajan! Karkotaka, Vasuki, Takshak, Prithushrava, Arun, Kunjar, Mishri, Shankha, Kumud, Pundarika, great man Dhritarashtra, Hrad, Krath, Shitikanth, Ugrateja, Chakramand, Atishanda, Nagapravar Durmukh, Ambarish, and King Varun himself also welcomed him. 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)