Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 16.4.14: वे अपने पूर्व शरीर का त्याग करने के पश्चात इस रूप में प्रकट हुए थे। उनके सहस्रों सिर थे। उनका विशाल शरीर पर्वत के समान विस्तृत प्रतीत हो रहा था। उनके मुख की कांति लाल रंग की थी। समुद्र ने स्वयं प्रकट होकर उस सर्प का - स्वयं भगवान अनंत का - स्वागत किया। दिव्य सर्पों और पवित्र नदियों ने भी उनका स्वागत किया॥14॥ | mahabharat अध्याय 16.4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन । mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे अपने पूर्व शरीर का त्याग करने के पश्चात इस रूप में प्रकट हुए थे। उनके सहस्रों सिर थे। उनका विशाल शरीर पर्वत के समान विस्तृत प्रतीत हो रहा था। उनके मुख की कांति लाल रंग की थी। समुद्र ने स्वयं प्रकट होकर उस सर्प का - स्वयं भगवान अनंत का - स्वागत किया। दिव्य सर्पों और पवित्र नदियों ने भी उनका स्वागत किया॥14॥
He had appeared in this form after leaving his previous body. He had thousands of heads. His huge body seemed like the expanse of a mountain. The glow of his face was red in colour. The ocean itself appeared and welcomed that serpent – the Lord Ananta himself. The divine serpents and the sacred rivers also welcomed him.॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥