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mahabharat 16.4.1: वैशम्पायन कहते हैं - राजन! तत्पश्चात दारुक, बभ्रु और भगवान श्रीकृष्ण तीनों बलराम के चरणचिह्नों को देखते हुए वहाँ से चले गए। कुछ देर बाद उन्होंने देखा कि असीम पराक्रमी बलराम एक वृक्ष के नीचे एकान्त में ध्यानमग्न बैठे हैं।   |   mahabharat अध्याय 16.4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 4: दारुकका अर्जुनको सूचना देनेके लिये हस्तिनापुर जाना, बभ्रुका देहावसान एवं बलराम और श्रीकृष्णका परमधाम-गमन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  16.4.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो ययुर्दारुक: केशवश्च
बभ्रुश्च रामस्य पदं पतन्त:।
अथापश्यन् राममनन्तवीर्यं
वृक्षे स्थितं चिन्तयानं विविक्ते॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - राजन! तत्पश्चात दारुक, बभ्रु और भगवान श्रीकृष्ण तीनों बलराम के चरणचिह्नों को देखते हुए वहाँ से चले गए। कुछ देर बाद उन्होंने देखा कि असीम पराक्रमी बलराम एक वृक्ष के नीचे एकान्त में ध्यानमग्न बैठे हैं।
 
Vaishampayana says - King! Thereafter Daruk, Babhru and Lord Krishna all three left the place looking at the footprints of Balarama. After some time they saw the infinitely powerful Balarama sitting under a tree, meditating in solitude.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)