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mahabharat 16.3.43-44h: वहाँ मारे गए किसी भी योद्धा के मन में वहाँ से भागने का विचार नहीं आया। समय के चक्र में हो रहे इस परिवर्तन को जानकर, शक्तिशाली मधुसूदन मूसल का सहारा लेकर चुपचाप वहाँ खड़ा सब कुछ देखता रहा।   |   mahabharat अध्याय 16.3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  16.3.43-44h 
नासीत् पलायने बुद्धिर्वध्यमानस्य कस्यचित्।
तत्रापश्यन्महाबाहुर्जानन् कालस्य पर्ययम्॥ ४३॥
मुसलं समवष्टभ्य तस्थौ स मधुसूदन:।
 
 
अनुवाद
वहाँ मारे गए किसी भी योद्धा के मन में वहाँ से भागने का विचार नहीं आया। समय के चक्र में हो रहे इस परिवर्तन को जानकर, शक्तिशाली मधुसूदन मूसल का सहारा लेकर चुपचाप वहाँ खड़ा सब कुछ देखता रहा।
 
No warrior who was killed there had any thought of running away from there. Knowing this change in the wheel of time, the powerful Madhusudan stood there quietly watching everything and taking the support of the pestle. 43 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)