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mahabharat 16.3.40-41h: हे राजन! वह जिस भी घास के तिनके पर प्रहार करता, वह अभेद्य वस्तु को भी भेद देता और हथौड़े के समान मूसल के समान मजबूत प्रतीत होता।   |   mahabharat अध्याय 16.3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  16.3.40-41h 
अविध्यान् वध्यते राजन् प्रक्षिपन्ति स्म यत् तृणम्॥ ४०॥
तद् वज्रभूतं मुसलं व्यदृश्यत तदा दृढम्।
 
 
अनुवाद
हे राजन! वह जिस भी घास के तिनके पर प्रहार करता, वह अभेद्य वस्तु को भी भेद देता और हथौड़े के समान मूसल के समान मजबूत प्रतीत होता।
 
O King! Whatever blade of grass he struck, it would pierce even the most impenetrable object and would appear as strong as a hammer-like pestle. 40 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)