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श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  16.3.38-39h 
यस्तेषामेरकां कश्चिज्जग्राह कुपितो नृप॥ ३८॥
वज्रभूतेव सा राजन्नदृश्यत तदा विभो।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! उनमें से जो कोई क्रोधित होकर एरका नामक घास ले लेगा, उसके हाथ में वह वज्र के समान प्रतीत होगी। 38 1/2
 
O Lord of men! Whoever amongst them would get angry and take the grass called Erka, it would appear like a thunderbolt in his hand. 38 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)