श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार  »  श्लोक 25-27
 
 
श्लोक  16.3.25-27 
तत उत्थाय सक्रोध: सात्यकिर्वाक्यमब्रवीत्।
पञ्चानां द्रौपदेयानां धृष्टद्युम्नशिखण्डिनो:॥ २५॥
एष गच्छामि पदवीं सत्येन च तथा शपे।
सौप्तिके ये च निहता: सुप्ता येन दुरात्मना॥ २६॥
द्र्रोणपुत्रसहायेन पापेन कृतवर्मणा।
समाप्तमायुरस्याद्य यशश्चैव सुमध्यमे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध में भरे हुए सात्यकि ने खड़े होकर कहा - 'सुमध्यमे! देखो, मैं द्रौपदी के पाँचों पुत्रों धृष्टद्युम्न और शिखण्डी के मार्ग का अनुसरण कर रहा हूँ, अर्थात् उनके वध का बदला ले रहा हूँ और मैं सत्य की शपथ लेकर कहता हूँ कि जिस पापी दुष्टात्मा कृतवर्मा ने द्रोणपुत्र का सहायक बनकर रात्रि में सोते हुए उन वीरों का वध किया था, आज उसकी आयु और यश भी समाप्त हो गया है।'॥25-27॥
 
Then Satyaki, filled with anger, stood up and said, 'Sumadhyame! Look, I am following the path of Draupadi's five sons, Dhrishtadyumna and Shikhandi, that is, I am taking revenge for their killing and I swear by truth that the sinful evil soul Kritavarman, who became the helper of Drona's son and killed those heroes while they were sleeping at night, today his age and fame have also come to an end.'॥ 25-27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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