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mahabharat 16.3.12: जब महात्मा उद्धव भगवान श्रीकृष्ण को हाथ जोड़कर प्रणाम करके वहाँ से चले गए, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें वहाँ रोकना नहीं चाहा; क्योंकि वे जानते थे कि यहाँ रहने वाले वृष्णिवंशियों का नाश होने वाला है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 16.3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  16.3.12 
तं प्रस्थितं महात्मानमभिवाद्य कृताञ्जलिम्।
जानन् विनाशं वृष्णीनां नैच्छद् वारयितुं हरि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जब महात्मा उद्धव भगवान श्रीकृष्ण को हाथ जोड़कर प्रणाम करके वहाँ से चले गए, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें वहाँ रोकना नहीं चाहा; क्योंकि वे जानते थे कि यहाँ रहने वाले वृष्णिवंशियों का नाश होने वाला है॥12॥
 
When Mahatma Uddhav left from there after saluting Lord Krishna with folded hands, Shri Krishna did not wish to stop him there; Because they knew that the Vrishnivanshis staying here were going to be destroyed. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)