श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 3: कृतवर्मा आदि समस्त यादवोंका परस्पर संहार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  16.3.10 
तत: प्रभासे न्यवसन् यथोद्दिष्टं यथागृहम्।
प्रभूतभक्ष्यपेयास्ते सदारा यादवास्तदा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय सब यदुवंशी अपनी-अपनी स्त्रियों सहित प्रभास क्षेत्र में पहुँचकर अपने-अपने घरों में रहने लगे। उनके पास खाने-पीने का बहुत-सा सामान था॥10॥
 
At that time all the Yaduvanshis along with their women reached Prabhas Kshetra and stayed in their own houses. They had a lot of food and drink with them.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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