श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  16.2.8 
पाण्डुरा रक्तपादाश्च विहगा: कालचोदिता:।
वृष्ण्यन्धकानां गेहेषु कपोता व्यचरंस्तदा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
काल की प्रेरणा से श्वेत पंख और लाल पैरों वाले कबूतर वृष्णि और अंधकों के घरों में विचरण करने लगे।
 
By the inspiration of Kaal, pigeons with white wings and red feet began to roam around in the houses of the Vrishnis and Andhakas. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)