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mahabharat 16.2.21: उन्होंने कहा, "जब हमारे सगे-संबंधी मारे गए और अपने पुत्रों को खोने के दुःख से देवी गांधारी दुखी थीं, तब उन्होंने हमारे कुल को श्राप दिया था। अब उसके पूर्ण होने का समय आ गया है।"   |   mahabharat अध्याय 16.2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  16.2.21 
पुत्रशोकाभिसंतप्ता गान्धारी हतबान्धवा।
यदनुव्याजहारार्ता तदिदं समुपागमत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, "जब हमारे सगे-संबंधी मारे गए और अपने पुत्रों को खोने के दुःख से देवी गांधारी दुखी थीं, तब उन्होंने हमारे कुल को श्राप दिया था। अब उसके पूर्ण होने का समय आ गया है।"
 
He said, 'When our relatives were killed and she was grief-stricken with the grief of losing her sons, Goddess Gandhari had pronounced a curse on our clan. Now is the time for its fulfillment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)