श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  16.2.19 
चतुर्दशी पञ्चदशी कृतेयं राहुणा पुन:।
प्राप्ते वै भारते युद्धे प्राप्ता चाद्य क्षयाय न:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वीरों! इस समय राहु ने चतुर्दशी को पुनः अमावस्या बना दिया है। आज भी वही स्थिति है जो महाभारत युद्ध के समय थी। यह सब हमारे विनाश का संकेत है।॥19॥
 
‘Heroes! At this time Rahu has again turned Chaturdashi into Amavasya. The situation today is the same as it was during the Mahabharata war. All this is an indication of our destruction.’॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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