श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  16.2.17 
नदन्तं पाञ्चजन्यं च वृष्ण्यन्धकनिवेशने।
समन्तात् पर्यवाशन्त रासभा दारुणस्वरा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान श्रीकृष्ण का पाञ्चजन्य शंख बजा, तब वृष्णियों और अंधों के घर के चारों ओर भयंकर शब्द करने वाले गधे रेंकने लगे॥17॥
 
When the Panchajanya conch of Lord Shri Krishna was blown, then the donkeys with terrible sounds started braying all around the house of Vrishnis and blind people. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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