श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  16.2.11 
गुरूंश्चाप्यवमन्यन्ते न तु रामजनार्दनौ।
पत्न्य: पतीनुच्चरन्त पत्नीश्च पतयस्तथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, वे अपने बड़ों का भी अपमान करते थे। वे केवल बलराम और श्रीकृष्ण का ही अपमान नहीं करते थे। पत्नियाँ अपने पतियों को और पति अपनी पत्नियों को धोखा देने लगे।॥11॥
 
Not only this, they used to insult their elders also. They did not only insult Balarama and Shri Krishna. Wives started cheating on their husbands and husbands started cheating on their wives.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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