श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 2: द्वारकामें भयंकर उत्पात देखकर भगवान‍् श्रीकृष्णका यदुवंशियोंको तीर्थयात्राके लिये आदेश देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  16.2.1 
वैशम्पायन उवाच
एवं प्रयतमानानां वृष्णीनामन्धकै: सह।
कालो गृहाणि सर्वेषां परिचक्राम नित्यश:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'हे राजन! इस प्रकार वृष्णि और अंधक कुल के लोग अपने ऊपर आने वाली विपत्ति को दूर करने के लिए तरह-तरह के प्रयत्न कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर मृत्यु प्रतिदिन सबके घरों में आ रही थी।
 
Vaishmpayana says, 'O King! In this way the people of the Vrishni and Andhaka clans were making various efforts to ward off the calamity that was befalling them, while on the other hand death was visiting everyone's houses every day.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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