श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  16.1.27 
असूत शापजं घोरं तच्च राज्ञे न्यवेदयन्।
विषण्णरूपस्तद् राजा सूक्ष्मं चूर्णमकारयत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब साम्ब ने शापित मूसल निकाला, तो यदुवंशियों ने उसे लेकर राजा उग्रसेन को दे दिया। उसे देखकर राजा बहुत दुःखी हुए। उन्होंने मूसल को चूर्ण-चूर्ण कर डाला॥27॥
 
When Samba produced the cursed pestle, the Yaduvanshis took it and gave it to King Ugrasen. The king was filled with sorrow on seeing it. He had the pestle crushed into very fine powder.॥27॥
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