श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  16.1.26 
येन वृष्ण्यन्धककुले पुरुषा भस्मसात् कृता:।
वृष्ण्यन्धकविनाशाय किंकरप्रतिमं महत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वह वही मूसल था जिसने वृष्णि और अंधकुल के समस्त मनुष्यों को भस्म कर दिया था। वृष्णि और अंधक वंश के वीरों का नाश करने में वह महान यमदूत के समान था ॥26॥
 
He was the same pestle which reduced Vrishni and all the men of Andhakula to ashes. He was equal to the great Yamdoota in destroying the heroes of Vrishni and Andhaka dynasty. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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