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mahabharat 16.1.18: हे राजन! हे मनुष्यों के स्वामी! जब यादवों ने ऐसी बातें कहकर ऋषियों को धोखा दिया और उनका इस प्रकार अपमान किया, तब उन्होंने उन बालकों को जो उत्तर दिया, उसे सुनो।   |   mahabharat अध्याय 16.1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा   ।   mahabharat पर्व 16: मौसल पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  16.1.18 
इत्युक्तास्ते तदा राजन् विप्रलम्भप्रधर्षिता:।
प्रत्यब्रुवंस्तान् मुनयो यत् तच्छृणु नराधिप॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे मनुष्यों के स्वामी! जब यादवों ने ऐसी बातें कहकर ऋषियों को धोखा दिया और उनका इस प्रकार अपमान किया, तब उन्होंने उन बालकों को जो उत्तर दिया, उसे सुनो।
 
O King! O lord of men! When the Yadavas deceived the sages by saying such things and insulted them in this manner, then listen to the answer they gave to those boys. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)