श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  16.1.14 
जनमेजय उवाच
केनानुशप्तास्ते वीरा: क्षयं वृष्ण्यन्धका गता:।
भोजाश्च द्विजवर्य त्वं विस्तरेणा वदस्व मे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा, "हे ब्राह्मण! वृष्णि, अंधक और भोज वंश के उन वीर योद्धाओं को किसने शाप दिया था जिसके कारण वे मारे गए? कृपया मुझे इस घटना को विस्तारपूर्वक बताइए।"
 
Janamejaya asked, "O Brahmin! Who cursed those brave warriors of Vrishni, Andhaka and Bhoja clans due to which they were killed? Please tell me this incident in detail." 14.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd