श्री महाभारत  »  पर्व 16: मौसल पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरका अपशकुन देखना, यादवोंके विनाशका समाचार सुनना, द्वारकामें ऋषियोंके शापवश साम्बके पेटसे मूसलकी उत्पत्ति तथा मदिराके निषेधकी कठोर आज्ञा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  16.1.12 
जनमेजय उवाच
कथं विनष्टा भगवन्नन्धका वृष्णिभि: सह।
पश्यतो वासुदेवस्य भोजाश्चैव महारथा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - प्रभु ! भगवान श्रीकृष्ण के देखते-देखते वृष्णियों सहित अंधक और महारथी भोजवंशी क्षत्रिय कैसे नष्ट हो गए ? 12॥
 
Janamejaya asked – Lord! How did Andhak and the Maharathi Bhojvanshi Kshatriyas along with the Vrishnis get destroyed before the eyes of Lord Shri Krishna? 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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