Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.9.18: धृतराष्ट्र के ऐसा कहने पर नगर और जनपद के सभी लोग नेत्रों से आँसू बहाते हुए एक-दूसरे का मुख देखने लगे। किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया॥18॥ | mahabharat अध्याय 15.9: प्रजाजनोंसे धृतराष्ट्रकी क्षमा-प्रार्थना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्तास्तेन ते सर्वे पौरजानपदा जना:।
नोचुर्बाष्पकला: किंचिद् वीक्षांचक्रु: परस्परम्॥ १८॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र के ऐसा कहने पर नगर और जनपद के सभी लोग नेत्रों से आँसू बहाते हुए एक-दूसरे का मुख देखने लगे। किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया॥18॥
When Dhritarashtra said this, all the people in the city and the district started looking at each other's faces while shedding tears from their eyes. No one gave any answer.॥ 18॥
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि धृतराष्ट्रप्रार्थने नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें धृतराष्ट्रकी प्रार्थनाविषयक नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल १९ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥