Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.9.1-2h: धृतराष्ट्र बोले - सज्जनों! महाराज शान्तनु ने इस पृथ्वी का यथावत् पालन किया था। तत्पश्चात् भीष्म द्वारा रक्षित होकर हमारे बुद्धिमान पिता विचित्रवीर्य ने इस लोक की रक्षा की; इसमें कोई संदेह नहीं है। 1 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.9: प्रजाजनोंसे धृतराष्ट्रकी क्षमा-प्रार्थना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र उवाच
शान्तनु: पालयामास यथावद् वसुधामिमाम्।
तथा विचित्रवीर्यश्च भीष्मेण परिपालित:॥ १॥
पालयामास नस्तातो विदितार्थो न संशय:।
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - सज्जनों! महाराज शान्तनु ने इस पृथ्वी का यथावत् पालन किया था। तत्पश्चात् भीष्म द्वारा रक्षित होकर हमारे बुद्धिमान पिता विचित्रवीर्य ने इस लोक की रक्षा की; इसमें कोई संदेह नहीं है। 1 1/2॥
Dhritarashtra said – Gentlemen! Maharaj Shantanu had followed this earth exactly as it was. After that, protected by Bhishma, our wise father Vichitravirya protected this world; There is no doubt in it. 1 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥