श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  15.8.7 
अनुज्ञात: स्वयं तेन व्यासेन त्वं महर्षिणा।
युधिष्ठिरस्यानुमते कदारण्यं गमिष्यसि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! महर्षि व्यास ने स्वयं आपको वन जाने की अनुमति दे दी है और युधिष्ठिर ने भी अनुमति दे दी है। अब आप वन कब जाएँगे?॥7॥
 
‘Maharaj! Maharishi Vyasa himself has given you permission to go to the forest and Yudhishthira has also given his permission. Now when will you go to the forest?’॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)