Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.8.5: पुत्र! अब चुप हो जाओ। मेरे लिए बोलना बहुत कठिन है (अब मैं केवल जाने की अनुमति चाहता हूँ)।' ऐसा कहकर राजा धृतराष्ट्र ने गांधारी के महल में प्रवेश किया। | mahabharat अध्याय 15.8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्र संशाम्यतां तावन्ममापि बलवान् श्रम:।
इत्युक्त्वा प्राविशद् राजा गान्धार्या भवनं तदा॥ ५॥
अनुवाद
पुत्र! अब चुप हो जाओ। मेरे लिए बोलना बहुत कठिन है (अब मैं केवल जाने की अनुमति चाहता हूँ)।' ऐसा कहकर राजा धृतराष्ट्र ने गांधारी के महल में प्रवेश किया।
Son! Now be quiet. It is very difficult for me to speak (now I just want permission to leave).' Saying this, King Dhritarashtra then entered Gandhari's palace. 5.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥