vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
»
अध्याय 8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना
»
श्लोक 3
श्लोक
15.8.3
यत् तु मामनुशास्तीह भवानद्य हिते स्थित:।
कर्तास्मि तन्महीपाल निर्वृतो भव पार्थिव॥ ३॥
अनुवाद
हे राजन! हे पृथ्वी के स्वामी! आज मैं अपने कल्याण में तत्पर होकर, यहाँ आप जो भी उपदेश देंगे, उसका पालन करूँगा। आप संतुष्ट हों॥3॥
O King! O lord of the earth! Today, being engaged in my welfare, I will follow whatever advice you give me here. May you be satisfied.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×