Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.8.24: जब उन्होंने देखा कि वे सभी इतने दुःखी हैं कि कोई उत्तर नहीं दे रहे हैं, तब महाबली धृतराष्ट्र ने पुनः बोलना प्रारम्भ किया।   |   mahabharat अध्याय 15.8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  15.8.24 
तानविब्रुवत: किंचित् सर्वान् शोकपरायणान्।
पुनरेव महातेजा धृतराष्ट्रोऽब्रवीदिदम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जब उन्होंने देखा कि वे सभी इतने दुःखी हैं कि कोई उत्तर नहीं दे रहे हैं, तब महाबली धृतराष्ट्र ने पुनः बोलना प्रारम्भ किया।
 
When they all saw that they were all so grief-stricken that they were not giving any reply, the mighty Dhritarashtra began speaking again.
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि धृतराष्ट्रकृतवनगमनप्रार्थनेऽष्टमोऽध्याय: ॥ ८ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें धृतराष्ट्रकी वनमें जानेके लिये प्रार्थनाविषयक आठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ८ ॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)