श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  15.8.21 
युधिष्ठिरगते राज्ये प्राप्तश्चास्मि सुखं महत्।
मन्ये दुर्योधनैश्वर्याद् विशिष्टमिति सत्तमा:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'सज्जनों! युधिष्ठिर के राज्य में मुझे महान सुख मिला है। मैं समझता हूँ कि दुर्योधन के राज्य से भी अधिक सुख मुझे मिला है।'॥21॥
 
‘Gentlemen! I have found great happiness in Yudhishthira's kingdom. I think I have found greater happiness than in Duryodhan's kingdom.'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)