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mahabharat 15.8.13-15h: भूपाल जनमेजय! राजा ने देखा कि सभी ग्रामवासी और जनपदवासी वहाँ आये हैं। सम्पूर्ण सुहृद समाज के लोग भी उपस्थित हैं और विभिन्न देशों के ब्राह्मण भी आये हैं। तब बुद्धिमान अम्बिकानन्दन राजा धृतराष्ट्र ने उन सबको लक्ष्य करके कहा-॥13-141/2"   |   mahabharat अध्याय 15.8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 8: धृतराष्ट्रका कुरुजांगलदेशकी प्रजासे वनमें जानेके लिये आज्ञा माँगना  »  श्लोक 13-15h
 
 
श्लोक  15.8.13-15h 
समवेतांश्च तान् सर्वान् पौरान् जानपदांस्तथा॥ १३॥
तानागतानभिप्रेक्ष्य समस्तं च सुहृज्जनम्।
ब्राह्मणांश्च महीपाल नानादेशसमागतान्॥ १४॥
उवाच मतिमान् राजा धृतराष्ट्रोऽम्बिकासुत:।
 
 
अनुवाद
भूपाल जनमेजय! राजा ने देखा कि सभी ग्रामवासी और जनपदवासी वहाँ आये हैं। सम्पूर्ण सुहृद समाज के लोग भी उपस्थित हैं और विभिन्न देशों के ब्राह्मण भी आये हैं। तब बुद्धिमान अम्बिकानन्दन राजा धृतराष्ट्र ने उन सबको लक्ष्य करके कहा-॥13-141/2"
 
Bhupal Janmejay! The king saw that all the villagers and people of the district had come there. People of the entire Suhrid community are also present and Brahmins from different countries have also come. Then the wise Ambikanandan king Dhritarashtra targeted them all and said – ॥ 13-14 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)